राज्य के नीति निदेशक तत्व in Indian Constitution

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Direct principal of the state policy 

हेलो दोस्तों आज हम आप सभी के लिए राज्य के नीति निदेशक तत्व से रिलेटेट पीडीऍफ़ लेकर आये है, हम आपको इस पीडीऍफ़ सम्पूर्ण जानकारी बतायेगे और यह राज्य के नीति निदेशक तत्व पीडीऍफ़ आपके आनी सरकारी परीक्षा जैसे SSC CGL, BANK, RAILWAYS, RRB NTPC, LIC  और भी अन्य परीक्षाओ के लिए बोहत ही महत्वपूर्ण साबित हो सकती है दोस्तों हमने इस पीडीऍफ़ लिंक आपके लिए निचे दे दी है जिसको आप आसानी से डाउनलोड कर सकते हो और अपनी परीक्षा की अच्छे से तयारी कर सकते हो

भारत का सविंधान विश्व का सबसे विस्तृत सविंधान। है , जो की नागरिको  एवं सरकारों दोनों को ही कुछ अधिकार और कर्तव्य प्रदान करता  है। इसी प्रकार अगर हम सरकारों के दायित्वों की बात करे तो सविंधान मै इसके लिए कुछ विशेष प्रावधान किये गए है। और इन्ही को निति निर्देशक तत्व के रूप में जाना जाता है ।

सविंधान में निदेशक तत्व –

सविंधान के  हर भाग में अलग – अलग प्रावधानों को रखा गया है , इसी प्रकार भारतीय सविंधान के भाग – चार मे अनुछेद 36 से 51 तक निदेशक तत्व का वर्णन किया गया है , जो की राज्यों के लिए दिशा – निर्देश है की वह अपनी निति बनाते समय इन निर्देशों का धयान रखे । राज्य का अर्थ यहां भारत सरकार एवं समस्त राज्यों की सरकार सभी शामिल है । ये तत्व हमारे सविंधान में आयरलैंड के सविंधान से लिए गए है ।

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निदेशक तत्वों की जरूरत

भारत एक लम्बे अरसे तक ब्रिटिश राज के अधीन रहा , जो की एक प्रकार का पुलिस राज्य हुआ करता था । आजादी के बाद हमारे सविंधान निर्माता एवं राजनेता  इस पुलिस शासन को समाप्त करना जरुरी समझते थे और वर्षो की इस दासता को ख़तम करना उनका लक्ष्या था इसिलय उन्होंने एक कल्याणकारी राज की स्थापना  का सपना देखा और जरुरी समझा की भारत एक ऐसा देश बने जो जनता का अधिक से अधिक भला करे सभी वर्गों का , सभी नागरिको का , सामान रूप से समाज में एक स्थान हो इसिलय सविंधान निदेशक – तत्वों का प्रावधान करता है ।

निदेशक – तत्वों की स्थिति  –

राज्य को अपने नागरिको को अधिक से अधिक सुविधाए देनी चाहिए यही एक कल्याण कारी राज्य का लक्ष्य है परन्तु इसके लिए देश के पास भरपूर संसाधन होना भी जरुरी है पर जब भारत आजाद हुआ तब देश की हालत ऐसे नहीं थे की नागरिको सभी सुविधा दी जाय इसलिए इन तत्वों को राज्य की क्षमता पर छोड़ दिया गया जब राज्य की परिस्थि इनके अनुकूल हो तब राजय को ऐसा करना चाहिए और इसिलय कोई भी नागरिक इनके लागु करवाने के लिए कोर्ट नहीं जा सकता जैसे हम मौलिक अधिकार के लिए जा सकते है । परन्तु जैसे – जैसे राजय की आर्थिक हालत अच्छी होती जायगी , देश की जनता सजग होगी , तब हर सरकार  को जनता का हित सर्वोपरि रखना होगा और ऐसे अपने आप ही निदेशक – तत्वों की पूर्ति हो जायगी ।

निदेशक – तत्वों की विशेषता –

जिस प्रकार मौलिक- अधिकार देश के नागरिको को राजनैतिक प्राधिकार देते है , उसी तरह निदेशक तत्व सभी नागरिको को सामजिक – आर्थिक न्याय प्रदान करते है , जो की सबके लिए जरुरी है । और इस 21 वी सदी में आज भारत की 70% से जायदा जनता साक्षर है तो बिना किसी न्यायलय की मदद के इन लोक नियोजन के कार्यो को सरकार को लागु करना पड़ता है , जो सरकार जनहित  के कार्यो को नहीं करती उसका परिणाम वह चुनाव में देख लेती है , अंतिम शक्ति जनता के हाथ में है । 

लोककल्याण के उदारहण – 

अगर हम लोककल्याण के बारे मे समझे तो इसे कुछ महत्व पूर्ण आर्टिकल को देख कर समझा जा सकता है , जैसे आर्टिकल 48 सरकार का कर्तव्य है की वह नागरिको को पर्यावण से संबंधित जानकारी दे , पर्यावरण सुरक्षा दे, इस पर नीतिया लागू करे अंतर्राष्ट्रीय  नियमो का पालन करे । इसी प्रकार आर्टिकल 51 कहता है , सरकार अंतर्राष्ट्रीय शांति के प्रयास करे , आर्टिकल 40 के अनुसार पंचायत का घट्न करे , महिलाओ के लिए विशेष प्रावधान करे ऐसे कई सारे कार्य जनता के हित में सरकार करती है ।




(1) राज्य के नीति निदेशक सिद्धान्त क्या हैं?
(a) संविधान के निर्माताओं के मुख्य उद्देश्य
(b) ये ऐसे सिद्धांत हैं जिनके द्वारा राज्य को अच्छा शासन चलाने के निर्देश दिये गये हैं|
(c) ये ऐसे कल्याणकारी राज्य की स्थापना के आदर्श हैं जिन्हें अच्छे विचार के व्यक्तियों द्वारा अपनाया जाना चाहिये|
(d) संविधान के भाग-3 द्वारा लागू ऐसे सामाजिक अधिकार जिनका व्यक्तिगत अधिकार के रूप में अनुमोदन प्राप्त है|
Ans- b [MPAPO (Pre) 2008]

(2) नीति निर्देशक सिद्धान्त है-
(a) वाद योग्य
(b) वाद योग्य नहीं
(c) मौलिक अधिकार
(d) कोई नहीं
Ans- b [MPPSC (Pre) 1992, MPPSC (Pre) GS 2013]

(3) राज्य नीति के निदेशक सिद्धांत हैं-
(a) न्यायोचित
(b) गैर न्यायोचित
(c) सभी न्यायोचित नहीं है लेकिन
(d) इनमें से कोई नहीं
Ans- b [Chhatisgarh. Civil Judge 2007]

(4) राज्य के नीति निदेशक तत्वों को लागू करना किसका कर्तव्य है?
(a) किसी का नहीं
(b) राज्य का
(c) केन्द्रीय शासन का ही केवल
(d) भारत के सभी नागरिकों का
Ans- b [UPAPO 1995]

(5) यदि सरकार द्वारा राज्य नीति के निदेशक सिद्धांतों को लागू नहीं किया जाता है, तो एक नागरिक निम्नलिखित में से किसके पास जा सकता है?
(a) उच्च न्यायालय
(b) उच्चतम न्यायालय
(c) राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग
(d) इनमें से कोई नहीं
Ans- d [SSC मैट्रिक स्तरीय परीक्षा, 2006]

(6) कथन (A): कोई भी व्यक्ति जो किसी नीति निर्देशक सिद्धान्त के उल्लंघन से प्रभावित होता है वह न्यायालय में नहीं जा सकता है।
कारण (R): नीति निर्देशक सिद्धान्तों को न्यायापालिका द्वारा लागू नहीं करवाया जा सकता।
कूट:
(a) A और R दोनों सही हैं, और R, A का सही स्पष्टीकरण है।
(b) A और R दोनों सही हैं, परन्तु R, A का सही स्पष्टीकरण नहीं है।
(c) A सही है, परन्तु R गलत है।
(d) A गलत है, परन्तु R सही है।
Ans- a [IAS (Pre) 2002]

(7) भारतीय संविधान में राज्य के नीति-निदेशक सिद्धान्त :
1. देश के शासन में मूलभूत महत्व के हैं
2. न्यायालयों द्वारा लागू नहीं कराये जा सकते
3. राज्य का कर्तव्य है कि विधि निर्माण में उनका सम्मान करे
निम्न कूट की सहायता से इन नीति-निदेशक सिद्धान्तों की वास्तविक प्रकृति बताइये:
(a) 1
(b) 1 और 3
(c) 1 और 2
(d) उपरोक्त तीनों
Ans- d [UPPCS (Pre) 2002]

(8) “राज्य के नीति निदेशक तत्वों” का सीधा संबंध है-
(a) केवल सामाजिक न्याय
(b) केवल आर्थिक न्याय
(c) केवल राजनीतिक न्याय
(d) उपर्युक्त सभी
Ans- d [MPAPO (Pre) 1997]

(9) राज्य के नीति निदेशक तत्व के पीछे बाध्यकारी बल है:
(a) लोक मत का
(b) सरकार का
(c) संविधान का
(d) प्रशासन का
Ans- a [UP Civil Judge (Pre) 2014]

(10) भारतीय संविधान के कितने अनुच्छेदों में राज्य के नीति-निर्देशक तत्वों का उल्लेख पाया जाता है?
(a) अनुच्छेद 36 से 51 तक
(b) अनुच्छेद 36 से 52 तक
(c) अनुच्छेद 36 से 53 तक
(d) अनुच्छेद 36 से 54 तक
Ans- a [Uttr. PCS (Pre) 2005]

(11) भारतीय संविधान के अनुच्छेद 36 से अनुच्छेद 51 मुख्यतः राज्य के नीति निर्देशक तत्व से संबंधित हैं, जो कि भारतीय संविधान के ______________ में दिए हुए हैं|
(a) भाग II
(b) भाग III
(c) भाग IV
(d) भाग V
Ans- c [SSC CHSL 2017, SSC FCI 2012, SSC Section off. 2007]

(12) भारतीय संविधान का भाग IV निम्नलिखित में से किससे संबंधित है?
(a) संघ
(b) राज्य
(c) मौलिक अधिकार
(d) राज्य के नीति निर्देशक तत्व
Ans- d [SSC CGL 2017]

(13) भारत के संविधान में शामिल ‘राज्य नीति के निदेशक सिद्धांतों की अवधारणा’ किसके संविधान से ली गई थी?
(a) ऑस्ट्रेलिया
(b) यू.एस.ए.
(c) कनाडा
(d) आयरलैंड
Ans- d [SSC CGL 2016, 2013, 2010, SSC CHSL 2015, 2011, SSC मैट्रिक स्तरीय परीक्षा, 2008, SSC Tax Asst. परीक्षा, 2009]

(14) राज्य के नीति निर्देशिक सिद्धान्तों को भारतीय संविधान में शामिल किए जाने का उद्देश्य है-
(a) राजनीतिक प्रजातन्त्र को स्थापित करना
(b) सामाजिक प्रजातन्त्र को स्थापित करना
(c) गाँधीवादी प्रजातन्त्र को स्थापित करना
(d) सामाजिक और आर्थिक प्रजातन्त्र को स्थापित करना
Ans- d [IAS (Pre) 2002]

(15) निम्नलिखित में से कौन एक राज्य के नीति निर्देशक सिद्धान्तों का उद्देश्य नहीं है?
(a) एक कल्याणकारी राज्य की स्थापना करना।
(b) सामाजिक आर्थिक न्याय को सुनिश्चित करना।
(c) एक धार्मिक राज्य की स्थापना करना।
(d) एक धर्मनिरपेक्ष राज्य की स्थापना करना।
Ans- c [UP RO/ARO (Pre) 2013, IAS (Pre) 2000]

(16) स्वर्णसिंह समिति ने जिस प्रश्न पर विचार किया वह था-
(a) जम्मू-कश्मीर के प्रतिरूप पंजाब को अधिक स्वायत्तता
(b) भारत के लिए राष्ट्रपति मूलक शासन की उपयुक्तता
(c) मूल अधिकारों की तुलना में निदेशक तत्वों को अग्रता
(d) प्रशासनिक सुधार
Ans- c [IAS (Pre) 1993]

(17) संविधान के किस संशोधन से राज्य नीति के निदेशक सिद्धांतों को मौलिक अधिकारों पर प्रमुखता की स्थिति मिली?
(a) 24वां संशोधन
(b) 30वां संशोधन
(c) 42वां संशोधन
(d) 44वां संशोधन
Ans- c [SSC FCI 2012, SSC CPO 2007, MPAPO (Pre) 2010]

(18) संविधान का कौन सा संशोधन यह प्रावधानित करता है कि कोई कानून जो राज्य के उन नीति निदेशक सिद्धान्तों को जो अनुच्छेद 39 (b) और (c) में वर्णित हैं, प्रभावी बनाने हेतु पारित किया जाए, इस कारण से निरस्त नहीं किया जाएगा कि वह अनुच्छेद 14 और 19 में प्रदत्त अधिकारों को सीमित करता है?
(a) 25वाँ संशोधन
(b) 28वाँ संशोधन
(c) 42वाँ संशोधन
(d) 44वाँ संशोधन
Ans- c [UPPCS (Main) 2009]

(19) संविधान के 42वें संशोधन द्वारा निम्नलिखित में से कौन सा सिद्धान्त राज्य की नीति के निदेशक तत्वों में जोड़ा गया था?
(a) पुरुष और स्त्री दोनों के लिए समान कार्य का समान वेतन
(b) उद्योगों के प्रबन्धन में कामगारों की सहभागिता
(c) काम, शिक्षा और सार्वजनिक सहायता पाने का अधिकार
(d) श्रमिकों के लिए निर्वाह-योग्य वेतन एवं काम की मानवीय दशाएं सुरक्षित करना
Ans- b [IAS (Pre) 2017]

(20) संविधान के 42वें संशोधन द्वारा राज्य के नीति-निदेशक सिद्धांतों के अध्याय में कुछ निर्देश जोड़े गये हैं, ये निर्देश नहीं हैं-
(a) समान न्याय एवं निःशुल्क कानूनी सहायता व्यवस्था
(b) प्रबंध में मजदूरों की भागीदारी
(c) वन्य-जीवन सुरक्षा
(d) विशेष परिस्थितियों में बाल-श्रम का समर्थन
Ans- d [UPPCS (Pre) 1997]

(21) भारतीय संविधान के 42वें संशोधन द्वारा राज्य के नीति निर्देशक तत्वों में जो परिवर्तन किए गए उनके सम्बन्ध में निम्नलिखित में कौन से वक्तव्य सही हैं-
1. इसने राज्य को नागरिकों को निःशुल्क कानूनी सहायता का प्रावधान करने के लिए सक्षम बनाया
2. इसने राज्य के द्वारा उपक्रमों के प्रबंधन में कामगारों की सहभागिता प्राप्त करने की व्यवस्था की
3. इसने दहेज प्राप्ति को दण्डनीय अपराध बनाया
नीचे दिये हुए कूट से सही उत्तर चुनिए-
(a) 1 और 2
(b) 1 और 3
(c) 2 और 3
(d) 1, 2 और 3
Ans- a [IAS (Pre) 1995]

(22) नीति निदेशक तत्वों के निम्नलिखित में तीन मामलों से बयालीसवें संशोधन का संबंध था –
1. उद्योगों के प्रबन्ध में श्रमिकों की साझेदारी
2. आय और ओहदों की असमानता को कम करना
3. पर्यावरण की रक्षा
4. निर्धनों की निःशुल्क कानूनी सहायता
सही उत्तर नीचे दिए हुए कूटों से चुनिए –
(a) 1, 3 और 4
(b) 1, 2 और 3
(c) 1, 2 और 4
(d) 2, 3 और 4
Ans- a [IAS (Pre) 1993]

(23) हमारे संविधान में “निदेशक सिद्धांत’-
(a) कानूनी न्यायालयों द्वारा प्रवर्तनीय हैं
(b) अर्ध-प्रवर्तनीय हैं
(c) आंशिक रूप से अप्रवर्तनीय हैं
(d) कानूनी अदालतों द्वारा अप्रवर्तनीय हैं
Ans- d [SSC Tax Asst. 2007]

(24) भारतीय संविधान का कौन-सा अनुच्छेद यह निर्धारित करता है कि राजकीय नीति के निदेशक सिद्धांत किसी न्यायालय द्वारा लागू नहीं किए जा सकते?
(a) अनुच्छेद 31
(b) अनुच्छेद 38
(c) अनुच्छेद 37
(d) अनुच्छेद 39
Ans- c [SSC CHSL 2013, RAS/RTS (Pre.) 2010]

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